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गणधीश जो ईश सर्वां गुणांचा | मुळारंभ आरंभ तो निर्गुणाचा | नमुं शारदा मूळ चत्वार वाचा | गमुं पंथ आनंत या राघवाचा | मना सज्जना भक्तीपंथेचि जावें | तरी श्रीहरी पाविजेतो स्वभावें | जनीं निंदय ते सर्व सोडूनि दयावें | जनीं वंदय ते सर्व भावे करावे | प्रभाते मनी राम चिंतीत जावा | पुढे वैखरी राम आधी वदावा | सदाचार हा थोर सांडू नये तो | जनीं तोचि तो मानवी धन्य होतो | मना वासना दुष्ट कामा न ये रे | मना सर्वथा पापबुद्धि नको रे | मना सर्वथा नीति सोडू नको हो | मना अंतरीं सार वीचार राहो | मना पापसंकल्प सोडूनि दयावा | मना सत्यसंकल्प जीविं धरावा | मना कल्पना ते नको विठायांची | विकारे घडे हो जनी सर्व ची ची | नको रे मना क्रोध हा खेदकारी | नको रे मना काम नाना विकारी | नको रे मना सर्वदा अंगिकारू | नको रे मना मत्सरू दंभ भारू | मना श्रेष्ठ धरिष्ट जीविं धरावे | मना बोलणे नीच सोशीत जावें | स्वयें सर्वदा नम्र वाचे वदावे | मना सर्व लोकांसि रे निववावें | देहे त्यागितां कीर्ती मागे उरावी | मना सज्जना हेचि क्रीया धरावी | मना चंदनाचे परी त्वां झिजावे | परी अंतरी सज्जना निववावे |