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जय जिनेन्द्र 🙏 आपका स्वागत है हमारी श्रृंखला “Jain Darshan: Sach Ko Kaise Dekhen?” के EP 77 में — जहाँ हम “सत्य को कैसे देखें?” इस गहरे प्रश्न को जैन दर्शन के आधार पर शांत और व्यवहारिक ढंग से समझने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले भाग (EP 76) में हमने “मतभेद और संवेदनशील सोच” को समझने का प्रयास किया था — कैसे दृष्टि-भेद, ज्ञान-सीमा और नय-दृष्टिकोण मतभेदों को जन्म देते हैं, और कैसे संवेदनशील, संयमित और अहिंसक सोच संवाद को स्पष्ट और शांत बना सकती है। अब यहाँ एक और मूलभूत प्रश्न सामने आता है— जब हर व्यक्ति अपनी दृष्टि, अवस्था और परिस्थिति से देखता है, तो फिर सत्य को सही ढंग से कैसे देखा जाए? और निर्णय लेने से पहले समझ को पक्का करने की जैन प्रक्रिया क्या है? इसी दिशा में, इस भाग (EP 77) में हम समझने की कोशिश करेंगे: • जैन दर्शन के अनुसार “सत्य” को देखने का अर्थ क्या है • एक ही वस्तु अलग-अलग परिस्थितियों में अलग क्यों दिखाई देती है • आंशिक सत्य और पूर्ण सत्य में क्या अंतर है • नय-दृष्टि सत्य-बोध में कैसे सहायता करती है • निश्चय-नय और व्यवहार-नय को अलग-अलग समझना क्यों आवश्यक है • और निर्णय से पहले समझ को शांत, स्थिर और सापेक्ष कैसे बनाया जाए इस एपिसोड में आप जानेंगे — Chapters — 00:00 Intro [00:02:13] अनुभव बनाम निर्णय [00:05:07] परिवर्तन के तीन चश्मे (काल, क्षेत्र, भाव) [00:08:50] मानवीय ज्ञान की सीमाएँ हमारा ज्ञान इंद्रियों और मन से आता है, जो स्वभाव से ही सीमित हैं (आंखें सब कुछ नहीं देख सकतीं)। [00:11:01] भाषा की विवशता सत्य बहुआयामी (Multi-dimensional) है [00:13:40] दृष्टि दोष vs अवस्था भ्रम यह बहुत सूक्ष्म भेद है: [00:17:45] अनेकांत: संतुलन की कला अनेकांत हमें बौद्धिक अहंकार से बचाता है। [00:20:01] स्यादवाद: बौद्धिक ईमानदारी 'स्यात' का अर्थ 'शायद' (Uncertainty) नहीं, बल्कि सटीकता (Precision) है। [00:22:22] निश्चय और व्यवहार नय का संतुलन सत्य को समझने के लिए दो लेंस ज़रूरी हैं: [00:25:08] निर्णय लेने की 4-चरणीय प्रक्रिया जैन दर्शन के अनुसार सही फैसला कैसे लें: [00:27:47] साधक के 3 आधार इस ज्ञान को जीवन में उतारने के लिए: ----------- 📚 शोध व स्रोत (Research & References): इस एपिसोड में दी गई सारी जानकारी केवल Jain Shastras और आचार्य-ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी बाहरी या आधुनिक विचार का उपयोग नहीं किया गया है। 👉 मुख्य संदर्भ ग्रंथ: इस भाग की सारी जानकारी इन चार जैन ग्रन्थों पर आधारित है: १) तत्त्वार्थसूत्र — आचार्य उमास्वामी २) आप्तमीमांसा — आचार्य समन्तभद्र ३) नय-साहित्य / नय-ग्रंथ (परम्परागत नय परम्परा) ४) प्रवचनसार — आचार्य कुंदकुंद इन्हीं आधारों पर हमने सत्य-बोध, दृष्टि-भेद, नय-दृष्टि, निर्णय-प्रक्रिया और व्यवहारिक विवेक जैसी बातों को सरल भाषा में समझने का प्रयास किया है। 🎧 Podcast Series Info: श्रृंखला / Podcast : Jain Darshan: Sach Ko Kaise Dekhen? भाग: 8 (EP 77) 🔹 Presented by : Rushabh Jain & Jinvani Shorts 🔹 Research & Script: Based on तत्त्वार्थसूत्र, आप्तमीमांसा, नय-साहित्य, प्रवचनसार 🔸 Narration: AI Voice (Directed by Rushabh Jain) 🔸 Editing by: Rushabh Jain ✅ 100% Original content researched, written & produced by our team. 📅 नया भाग हर 2 दिन में जारी किया जाएगा। इसलिए चैनल से जुड़े रहें हर नए अध्याय के साथ। #JainDarshan #SatyaKoKaiseDekhen #JainPhilosophy #NayDrishti #SachKoKaiseDekhen #JinvaniShorts 👉 Next Episode Reminder (Part 9): आप हमारे अगले भाग — “Satya Ko Kaise Samjhen Aur Joden?” (EP 78) में अवश्य जुड़ें। इसमें हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि सत्य के विभिन्न पक्षों को एक-दूसरे से जोड़कर संतुलित और विवेकपूर्ण निष्कर्ष तक कैसे पहुँचा जा सकता है। यह वीडियो हमारी स्वयं की अध्ययन-प्रक्रिया पर आधारित है। सभी शोध, लेखन और सामग्री का संकलन हमने अपने प्रयास से किया है। हम अभी सीखने की कोशिश कर रहे हैं और जैन दर्शन को सरल भाषा में समझने का प्रयास कर रहे हैं। जय जिनेन्द्र 🙏