У нас вы можете посмотреть бесплатно How to centrol your mind или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
रुको… अभी इसी वक्त अपने मन को रोककर दिखाओ। कर सकते हो? नहीं। क्योंकि सच ये है — तुम मन को नहीं चला रहे… मन तुम्हें चला रहा है। तुम सोचना बंद करना चाहते हो… लेकिन विचार रुकते नहीं। तुम शांत रहना चाहते हो… लेकिन अंदर तूफान चलता रहता है। Osho कहते हैं — “मन को नियंत्रित करने की कोशिश मत करो… क्योंकि नियंत्रित करने वाला भी मन ही है।” तो फिर रास्ता क्या है? आज हम समझेंगे — मन से लड़कर नहीं… बल्कि उसे देखकर उसे कैसे पार किया जाता है। – मन है क्या? ओशो कहते हैं — मन कोई वस्तु नहीं है। मन सिर्फ यादों, कल्पनाओं, इच्छाओं और डर का संग्रह है। जैसे बादल आकाश में आते-जाते हैं, वैसे ही विचार चेतना में आते-जाते हैं। समस्या विचारों में नहीं है… समस्या पहचान में है। हम विचारों को “मैं” मान लेते हैं। जब गुस्सा आता है — हम कहते हैं “मैं गुस्से में हूँ।” लेकिन ओशो कहते हैं — गुस्सा तुम्हारे भीतर हो रहा है… तुम गुस्सा नहीं हो। यही पहली समझ है। – दबाने से मन और ताकतवर होता है हम बचपन से सिखाए जाते हैं: बुरा मत सोचो गुस्सा मत करो डर मत दिखाओ लेकिन जब आप किसी चीज़ को दबाते हो… वो आपके अवचेतन में जमा हो जाती है। और फिर वही चीज़ कभी चिंता बनकर कभी डिप्रेशन बनकर कभी गुस्से के विस्फोट बनकर बाहर आती है। ओशो कहते हैं — “जो दबाया जाता है, वह ज़हर बन जाता है।” तो क्या करें? दबाना बंद करो। भागना बंद करो। बस देखना शुरू करो। साक्षी भाव (Witnessing) का रहस्य ओशो की पूरी शिक्षा एक शब्द में है — साक्षी। मतलब? जो भी हो रहा है… उसे बिना जज किए देखना। जब विचार आए — बस देखो। जब कामुकता आए — देखो। जब डर आए — देखो। कुछ मत करो। धीरे-धीरे आपको एक अजीब अनुभव होगा — आप विचारों से अलग महसूस करने लगोगे। एक दूरी बनेगी। और उसी दूरी में… आज़ादी जन्म लेती है। 🧘 – ध्यान का सही अर्थ लोग सोचते हैं ध्यान मतलब विचार रोक देना। लेकिन ओशो कहते हैं — विचार रोकने की कोशिश ही तनाव है। ध्यान का अर्थ है — जागरूकता। हर दिन 10 मिनट: शांत बैठो आँखें बंद करो साँस को आते-जाते देखो विचारों को छूना भी मत वो आएँगे… भागेंगे… कूदेंगे… तुम बस देखो। पहले 5 दिन मन और पागल होगा। क्योंकि अब उसे पहली बार कोई देख रहा है। लेकिन धीरे-धीरे… उसकी ऊर्जा कम होने लगेगी। ⏳– मन हमेशा समय में रहता है ओशो कहते हैं — मन का अस्तित्व समय में है। वो या तो अतीत में रहेगा — “काश ऐसा होता…” या भविष्य में रहेगा — “अगर ऐसा हो जाए तो…” लेकिन वर्तमान में? मन टिक नहीं सकता। जब तुम पूरी जागरूकता से इस क्षण में होते हो… मन गायब होने लगता है। इसलिए: चलते समय सिर्फ चलो। खाते समय सिर्फ खाओ। नहाते समय सिर्फ पानी को महसूस करो। वर्तमान ही ध्यान है। ⚡ – असली कंट्रोल क्या है? मन को कंट्रोल करना नहीं है। मन से अलग हो जाना है। जैसे ही तुम साक्षी बने — मन तुम्हारा मालिक नहीं रहेगा। वो होगा… लेकिन तुम्हें हिला नहीं पाएगा। तुम गुस्सा देखोगे — लेकिन गुस्से में नहीं बहोगे। तुम डर देखोगे — लेकिन डर तुम्हें नियंत्रित नहीं करेगा। यही असली शक्ति है। 🌌 – जब मन शांत होता है ओशो कहते हैं — “जब मन शांत होता है, तब पहली बार तुम खुद से मिलते हो।” उस शांति में कोई शब्द नहीं होता। कोई विचार नहीं होता। बस एक गहरी उपस्थिति होती है। और वही तुम्हारा असली स्वरूप है। 🎬 तो याद रखो… मन को हराने की कोशिश मत करो। मन को सुधारने की कोशिश मत करो। मन को बस देखो। जितना देखोगे… उतना वो कमजोर होगा। और एक दिन ऐसा आएगा… जब मन तुम्हारा सेवक होगा… और तुम उसके मालिक। यही ध्यान है। यही स्वतंत्रता है। यही ओशो का मार्ग है। अगर आप सच में अपने जीवन में बदलाव चाहते हैं — तो आज से 10 मिनट खुद को देखने का अभ्यास शुरू करें। क्योंकि मन को जीतना नहीं… पार करना है। Osho #osho #viral