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तो AI समझ लीजिए, सबसे बाहरी लेयर है। इसका सीधा-साधा मतलब है - मशीनों को स्मार्ट बनाना। इसकी जड़ें बहुत पुरानी हैं, Alan Turing जैसे थिंकर्स तक जाती हैं, जिन्होंने ये सोचना शुरू किया था कि क्या मशीनें भी सोच सकती हैं? *1:21 - 1:37* अब आते हैं मशीन लर्निंग (Machine Learning) पर। ये AI का ही एक हिस्सा है, एक सबसेट कह सकते हैं। इसमें मशीनों को एक्सपीरियंस से खुद-ब-खुद सीखने और बेहतर होने के लिए ट्रेन किया जाता है। मतलब हर चीज के लिए बार-बार कोड लिखने की जरूरत नहीं पड़ती। *1:38 - 1:55* और फिर आती है सबसे अंदर की लेयर - डीप लर्निंग (Deep Learning)। ये चीज ना, हमारे इंसानी दिमाग से इंस्पायर्ड है। ये न्यूरल नेटवर्क्स (Neural Networks) का इस्तेमाल करती है, ठीक वैसे ही जैसे हमारे दिमाग में न्यूरॉन्स होते हैं। आज जितने भी हम एडवांस AI सिस्टम्स देख रहे हैं, वो सब इसी पर चल रहे हैं। #ai *1:55 - 2:15* तो इसको समझने का सबसे आसान तरीका है एक रशियन डॉल (Russian Doll) की तरह सोचना। जानते हैं ना? एक गुड़िया के अंदर दूसरी, फिर उसके अंदर तीसरी। तो AI वो सबसे बड़ी वाली गुड़िया है। उसके अंदर है मशीन लर्निंग, और उसके भी अंदर है डीप लर्निंग। हर लेयर पिछली वाली का एक ज्यादा एडवांस्ड और पावरफुल वर्जन है। *2:15 - 2:25* अच्छा, बहुत हो गई थ्योरी। अब जरा रियल वर्ल्ड में आते हैं। पता है, AI कोई फ्यूचर की चीज नहीं है, ये यहीं है। हमारे आस-पास, हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। #artificial *2:26 - 2:40* कभी सोचा है, जब हम Siri या Alexa से कुछ पूछते हैं, या Netflix हमें बताता है कि अगला शो कौन सा देखना है, हम हर दिन AI यूज कर रहे हैं। कई बार तो हमें पता भी नहीं चलता। अरे फोन का जो ऑटोकरेक्ट है ना, वो भी AI ही है। #tech *2:40 - 2:51* और ये सिर्फ हमारी पर्सनल लाइफ तक ही सीमित नहीं है। AI बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज में एक क्रांति की तरह है। काम करने के जो पुराने तौर-तरीके थे ना, वो सब पूरी तरह से बदल रहे हैं। *2:52 - 3:07* हेल्थकेयर का ही उदाहरण ले लीजिए। AI अब एक्स-रे देखकर ट्यूमर का पता लगा सकता है। नई दवाइयां बनाने की रिसर्च को तेज कर सकता है। यहां तक कि सर्जरी में डॉक्टर्स को और ज्यादा सटीक होने में मदद कर रहा है। ये वाकई में जिंदगियां बदल रहा है। *3:08 - 3:18* तो चलिए अब वापस उसी बड़े सवाल पर आते हैं - हमारी नौकरियों का क्या होगा? देखिए ये सच है कि मुश्किलें हैं, चुनौतियां हैं, पर इसके साथ-साथ नए मौके, नए अवसर भी बन रहे हैं। #cs *3:18 - 3:37* और ये बदलाव ना, बहुत तेजी से आ रहा है। दुनिया की बड़ी-बड़ी रिपोर्ट्स यही बता रही हैं। जैसे World Economic Forum का अंदाजा है कि 2026 तक ही 8.5 करोड़ जॉब्स पर इसका असर दिख सकता है। और तो और McKinsey की रिपोर्ट कहती है कि 2030 तक करीब 14 फीसदी लोगों को अपना करियर ही बदलना पड़ सकता है। #btech *3:37 - 4:03* तो सवाल है, कौन सी नौकरियों पर सबसे ज्यादा खतरा है? देखिए, आमतौर पर वो काम जिनमें एक ही तरह के टास्क बार-बार करने होते हैं, जैसे डेटा एंट्री हो गया या बेसिक कस्टमर सर्विस। AI इन कामों को बहुत तेजी से और शायद ज्यादा अच्छे #ai #story #facts 8 से कर सकता है। पर, जिन कामों में क्रिएटिविटी, स्ट्रेटजी, और इंसानी समझ की जरूरत होती है, जैसे कि मैनेजमेंट, टीचिंग, वो जॉब्स कहीं ज्यादा सेफ हैं। #bca लेकिन नौकरियों की इस चिंता के बीच ना, सिक्के का एक दूसरा पहलू भी है। और वो है जबरदस्त इकोनॉमिक ग्रोथ का। McKinsey का अनुमान है कि AI दुनिया की इकॉनमी में करीब 13 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है। पता है ये कितना है? ये आज के चीन की पूरी इकॉनमी के बराबर है। इससे ग्लोबल जीडीपी में 7% तक का उछाल तो अब बात करते हैं प्रॉब्लम से सॉल्यूशन की तरफ। इस बदलते हुए दौर में हम खुद को तैयार कैसे करें? ऐसा क्या करें कि हम इस रेस में पीछे ना रह जाएं? #mca यही सबसे जरूरी सवाल है, है ना? देखिए डरने से तो कुछ होगा नहीं। हमें ये सोचना होगा कि इस नई दुनिया में हम अपनी जगह कैसे बना सकते हैं, और सिर्फ जगह ही नहीं, सफल कैसे हो सकते हैं? तो भविष्य के लिए तैयार होने के लिए ना, चार मेन स्ट्रेटजीस (Strategies) हैं। नंबर एक - लाइफलॉन्ग लर्निंग (Lifelong Learning)। मतलब हमेशा कुछ ना कुछ नया सीखते रहना होगा। नंबर दो - अपनी सॉफ्ट स्किल्स (Soft Skills) को डेवलप करना होगा। जैसे कम्युनिकेशन, क्रिएटिविटी। नंबर तीन - फुर्तीला बनना होगा। बदलाव को तेजी से अपनाना होगा। और चौथा - स्पेशलाइजेशन (Specialization)। किसी एक फील्ड में इतनी महारत हासिल कर लीजिए कि आप AI के साथ मिलकर काम कर सकें, उसे टक्कर देने की ये लाइन ना, आने वाले कल की एक बेहतरीन समरी है। भविष्य में इंसानी दिमाग और मशीन की परफेक्शन का एक मिक्स्चर देखने को मिलेगा। ये एक पार्टनरशिप होगी - इंसानों और मशीनों के बीच। जहां दोनों अपनी-अपनी ताकत का इस्तेमाल करके कुछ... कुछ कमाल का करेंगे। **6:10 - तो आखिर में, सवाल ये नहीं है कि इंसान जीतेगा या मशीन। असली सवाल ये है कि जब इंसानी सोच, इंसानी क्रिएटिविटी, और AI की बेहिसाब पावर एक साथ मिल जाएगी, तो हम सब मिलकर क्या कमाल की चीजें बना सकते हैं? आने वाला कल हमारे ही हाथों में है।