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करोड़ों जन्मों के पाप नष्ट कर देगी कृष्ण लीला की ये कथा ! #premanandjimaharaj #katha #krishna #premanandjipravachan #premanand #parmanandji #krishnaleela #satsang श्रीकृष्ण की अष्ट पटरानियों (रुक्मिणी, जांबवती, सत्यभामा, कालिंदी, मित्रविंदा, सत्या, भद्रा और लक्ष्मणा) में से पांच के विवाह का सुंदर वर्णन है। कालिंदी (यमुना): अर्जुन और श्रीकृष्ण जब वन में जाते हैं, तो यमुना किनारे सूर्यपुत्री कालिंदी तपस्या करती हुई मिलती हैं। वे श्रीकृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप कर रही थीं, जिसके बाद भगवान उन्हें स्वीकार करते हैं। मित्रविंदा: उज्जैन के राजा विंद और अनुविंद दुर्योधन के मित्र थे, लेकिन उनकी बहन मित्रविंदा मन ही मन श्रीकृष्ण को चाहती थीं। भगवान ने भरी सभा में जाकर बलपूर्वक मित्रविंदा का हरण किया और उनसे विवाह किया। सत्या (नाग्नजिती): कौशल देश (अयोध्या) के राजा नग्नजित की शर्त थी कि जो वीर सात अत्यंत क्रूर वीऔर दुर्दांत बैलों को एक साथ नाथ देगा, उसी से सत्या का विवाह होगा। भगवान ने एक साथ सात रूप धारण कर क्षण भर में उन बैलों को नाथ दिया। भद्रा: भगवान की बुआ श्रुतकीर्ति की पुत्री भद्रा को उनके भाइयों (संतर्दन आदि) ने स्वयं भगवान को पत्नी रूप में समर्पित किया। लक्ष्मणा: मद्र देश की राजकुमारी लक्ष्मणा का स्वयंवर अत्यंत कठिन था (द्रौपदी के स्वयंवर की तरह लक्ष्य भेदना था)। भगवान श्रीकृष्ण ने अकेले ही उस कठिन लक्ष्य को भेदकर लक्ष्मणा को अपनी पटरानी बनाया। 6 भौमासुर (नरकासुर) प्रसंग की पूर्वपीठिका अंत में महाराज जी बताते हैं कि किस तरह भौमासुर नामक असुर ने दुनिया भर से 16,100 राजकुमारियों को बंदी बना रखा था। भगवान इन सभी को मुक्त कराकर एक साथ 16,100 रूप धारण कर इनसे विवाह करते हैं।