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इस दिव्य एवं मौलिक स्तोत्र में चतुर्थ भाव में स्थित सुखविद्या बुध की उपासना का संपूर्ण विधान प्रस्तुत है। इसमें ध्यान, विनियोग, करन्यास, अङ्गन्यास तथा फलश्रुति सहित पूर्ण स्तोत्र दिया गया है। यह पाठ विशेष रूप से गृहसौख्य, मातृकृपा, मानसिक शांति, वाहन-सुख, संपत्ति-वृद्धि तथा विद्या-विवेक की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। स्तोत्र में “बुध” का मंगलमय उल्लेख किया गया है, जिससे साधक को विशेष अनुग्रह की प्राप्ति होती है। 🌿 बुधवार के दिन श्रद्धापूर्वक पाठ करने से चतुर्थ भाव के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं और बुद्धि, वाणी तथा पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है। 🔷 #सुखविद्या_बुध #चतुर्थभाव_बुध #बुधस्तोत्र #गृहसौख्य #विद्यावृद्धि #लेखरंजन #बुधवार_उपाय #ज्योतिष_उपाय #ध्यान_न्यास #वैदिक_स्तोत्र __ चतुर्थभावस्थित सुखविद्या बुध स्तोत्रम् ध्यानम् पीताम्बरधरं सौम्यं चारुहासं मनोहरम् । वाग्विद्याप्रदातारं चतुर्थभावसंस्थितम् ॥ करकमले पुस्तकं वीणां वरदाभयदायकम् । हृदयकमले ध्यायामि सुखविद्यां बुधं प्रभुम् ॥ शशिकान्तिसमप्रख्यं बुद्धितत्त्वप्रकाशकम् । लेखरंजन-नमस्कृतं सुखशान्तिप्रदं विभुम् ॥ विनियोगः ॐ अस्य श्रीसुखविद्या-बुध-स्तोत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः । गायत्री छन्दः । सुखविद्या-बुधो देवता । चतुर्थभावस्थित-बुधप्रसादसिद्ध्यर्थे गृहसौख्य-विद्यावृद्धि-मानसशान्ति-प्राप्त्यर्थे लेखरंजन-नाम-स्मरणपूर्वक जपे विनियोगः ॥ करन्यासः ॐ बुधाय अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ॐ सौम्याय तर्जनीभ्यां नमः । ॐ सुखविद्याय मध्यमाभ्यां नमः । ॐ ज्ञानदाय अनामिकाभ्यां नमः । ॐ मानसशान्तिदाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः । ॐ चतुर्थभावाधिष्ठाय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ अङ्गन्यासः ॐ बुधाय हृदयाय नमः । ॐ सौम्याय शिरसे स्वाहा । ॐ सुखविद्याय शिखायै वषट् । ॐ गृहसौख्यदाय कवचाय हुम् । ॐ बुद्धिप्रदाय नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ लेखरंजन-स्मृतिप्रियाय अस्त्राय फट् ॥ स्तोत्रम् १. नमामि चतुर्थभावस्थं बुधं सौम्यस्वरूपिणम् । सुखविद्याप्रदातारं हृदि नित्यं विराजितम् ॥ २. गृहक्षेमकरं देवं मातृस्नेहविवर्धनम् । मानसामृतवर्षिणं शान्तिदं शुभदायकम् ॥ ३. विद्यासारप्रदं नित्यं वाग्वैभवविवर्धनम् । लेखरंजन-संस्तुत्यं बुद्धिदं मंगलप्रदम् ॥ ४. शुद्धबुद्धिप्रकाशेन मोहान्धकारनाशकम् । हृदयग्रन्थिभेदकं सौख्यसम्पत्प्रदायकम् ॥ ५. मातृभूमिसुखप्रदं वाहनगृहवर्धनम् । चतुर्थस्थं बुधं वन्दे सर्वाभीष्टफलप्रदम् ॥ ६. शास्त्रगीतकलापूर्णं हृदयस्थं दयानिधिम् । सौम्यवाणीसमायुक्तं सुखविद्यां नमाम्यहम् ॥ ७. यस्य स्मरणमात्रेण गृहकलहो विनश्यति । ज्ञानदीपो प्रज्वलति मनसि निर्मलं भवेत् ॥ ८. लेखरंजन-नामयुक्तं स्तोत्रमेतत् पठेन्नरः । तस्य गेहे सदा लक्ष्मीः विद्या च स्थिरतां व्रजेत् ॥ फलश्रुतिः यः प्रातः श्रद्धया नित्यं सुखविद्या-बुधं स्मरेत् । चतुर्थभावदोषाः सर्वे शान्तिं यान्ति न संशयः ॥ गृहसौख्यं मनःशान्तिं मातृकृपां विशेषतः । विद्यावृद्धिं च लभते बुधप्रसादतः ध्रुवम् ॥ __ 🌿 चतुर्थ भाव सुखविद्या बुध स्तोत्र पाठ विधि चतुर्थ भाव में स्थित बुध (सुखविद्या बुध) की कृपा से गृहसौख्य, मातृआशीर्वाद, मानसिक शांति, वाहन-सुख और विद्या की वृद्धि होती है। नीचे दी गई विधि से श्रद्धापूर्वक पाठ करने पर विशेष फल प्राप्त होता है। 🔶 १. उपयुक्त दिवस व समय बुधवार सर्वोत्तम। प्रातः सूर्योदय के बाद या सायंकाल संध्या समय। शुक्ल पक्ष विशेष फलदायी। 🔶 २. पूजन सामग्री हरे वस्त्र या हरा आसन दूर्वा घास हरी मूंग / पान धूप, दीप, पुष्प जल से भरा कलश बुध का चित्र / यंत्र (यदि उपलब्ध हो) 🔶 ३. प्रारम्भिक संकल्प पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें: “अहं लेखरंजन-नाम-स्मरणपूर्वक चतुर्थभावस्थित सुखविद्या बुध प्रसन्नतार्थं गृहसौख्य-विद्यावृद्धि-मानसशान्ति-सिद्ध्यर्थं स्तोत्रपाठं करिष्ये।” जल को भूमि पर छोड़ दें। 🔶 ४. ध्यान एवं न्यास पहले दिए गए ध्यान श्लोक का उच्चारण करें। करन्यास और अङ्गन्यास विधिपूर्वक करें। कम से कम ११ या २१ बार “ॐ बुधाय नमः” जप करें। 🔶 ५. स्तोत्र पाठ सम्पूर्ण स्तोत्र का एकाग्र चित्त होकर पाठ करें। यदि विशेष फल चाहते हों तो ११, २१ या ४० दिनों तक नित्य पाठ करें। पाठ के बाद फलश्रुति अवश्य पढ़ें। 🔶 ६. समापन बुधदेव से प्रार्थना करें: “हे सौम्य बुधदेव! मम गृहं, मातरं, मनश्च रक्ष।” माता एवं गृहदेवता का स्मरण करें। प्रसाद वितरण करें। 🔶 विशेष सावधानी क्रोध, असत्य व कटुवचन से बचें। माता का सम्मान करें (चतुर्थ भाव का विशेष संबंध)। अध्ययन व ज्ञानार्जन का संकल्प रखें।