У нас вы можете посмотреть бесплатно "चढ़ती कला, तेरे भाने सर्व का भला"। "संगमयुग है चढ़ती कला का युग इसमें सभी का भला होता"।(23/02/2026) или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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ओम् शांति। "मीठे बच्चे- यह संगमयुग है चढ़ती कला का युग", "इसमें सभी का भला होता है"। इसलिए "कहा जाता- चढ़ती कला तेरे भाने सर्व का भला''। "बाप समझाते हैं- मैं तुमको राजयोग सिखाता हूँ", श्रीकृष्ण सिखाता नहीं"। "श्रीकृष्ण तो सतयुग का प्रिंस है"। "स्वर्ग में जो सूर्यवंशी-चंद्रवंशी देवताएं थे उनमें कोई ज्ञान नहीं"। "ज्ञान तो प्राय:लोप हो जाएगा"। "ज्ञान है ही सद्गति के लिए"। "सतयुग में दुर्गति में कोई होता ही नहीं"। "वह है ही सतयुग, अभी है कलियुग"। "भारत में पहले सूर्यवंशी 8 जन्म फिर चंद्रवंशी 12 जन्म"। "यह एक जन्म अभी तुम्हारा सबसे अच्छा जन्म है"। "तुम हो प्रजापिता ब्रह्मा मुख वंशावली"। "यह है सर्वोत्तम धर्म"। "देवता धर्म सर्वोत्तम धर्म नहीं कहेंगे"। "ब्राह्मण धर्म सबसे ऊंच है"। "देवताएं तो प्रालब्ध भोगते हैं"। अच्छा। (23/02/2026) ओम् शांति। "मीठे बच्चे- अभी तुम्हें संगमयुग पर रूहानी सेवा करके गायन लायक बनना है फिर भविष्य सतयुग में पुरुषोत्तम बनने से तुम द्वापरयुग से पूजा लायक बन जाएंगे''। "देह-अभिमान की बीमारी जड़ से समाप्त हो तब बाप की दिल पर चढ़ेंगे"। "इसी देह-अभिमान के कारण सभी विकारों ने महारोगी बनाया है"। "बाप की दिल पर चढ़ना है तो विशाल बुद्धि बनो, ज्ञान चिता पर बैठो"। "रूहानी सेवा में लग जाओ और वाणी चलाने के साथ-साथ बाप को अच्छी रीति याद करो"। अच्छा। (28.10.2025) ओम् शांति। "मीठे बच्चे- तुम्हें एक बाप से एक मत (श्रीमत) मिलती है, जिसे अद्वेत मत कहते हैं, इसी अद्वेत मत से तुम्हें देवता बनना है''। "तुम्हारी बुद्धि में है हम सो देवता बन रहे हैं- नई दुनिया के लिए"। "अमरलोक, नई दुनिया सतयुग" को ही कहा जाता है। "अभी तो न सतयुग है, न देवताओं का राज्य है"। यहां तो हो नहीं सकता। "तुम जानते हो- यह सृष्टि चक्र घूमकर अभी हम कलियुग के भी अंत में आकर पहुंचे हैं"। "यह सृष्टि चक्र हूबहू 5 हज़ार वर्ष बाद फिरता रहता है"। "मनुष्य 84 जन्म ही लेते हैं, हिसाब है"। "इस देवी-देवता धर्म को अद्वेत धर्म भी कहा जाता है"। "अद्वेत शास्त्र भी माना जाता है"। "हमारा घर, स्वीट होम कहां है? उसका रास्ता ही इस खेल में आकर हम मनुष्य भूल गए हैं"। पता ही नहीं है कि घर कब जाना है? और कैसे जाना है? "अभी बाप आए हैं तुम सबको घर साथ ले जाने"। "तुम्हारा अभी पुरुषार्थ है वाणी से परे स्वीट होम में जाने का"। तुम्हारा "बाप, टीचर, गुरु तीनों एक शिव ही हैं फिर भी भूल जाते हैं। तुम्हारी रावण के साथ लड़ाई भी इसमें है। "बाप कहते हैं- हे आत्माएं, तुम सतोप्रधान थी, अभी तमोप्रधान बनी हो"। "जब शांतिधाम में थी तो पवित्र थी"। "प्यूरिटी के बिगर कोई आत्मा ऊपर में रह नहीं सकती" इसलिए "सब आत्माएं पतित-पावन बाप को बुलाती रहती हैं"। "जब सभी पतित तमोप्रधान बन जाते हैं, तब बाप आकर कहते हैं- मैं तुमको सतोप्रधान बनाता हूँ"। "तुम जब शांतिधाम में थे तो वहां सब पवित्र थे"। "अपवित्र आत्मा वहां कोई रह न सके"। सबको सज़ाएं भोगकर "पवित्र" जरूर बनना है। "पवित्र बनने बिगर कोई शांतिधाम वापिस जा न सके"। "शिवबाबा ने रूहानी बच्चों को समझाया है- "ओम्" का अर्थ अलग है और "सो हम" का अर्थ अलग है। उन्होंने फिर "ओम्, सो हम सो" का अर्थ एक कर दिया है। "तुम आत्मा शांतिधाम में रहने वाली हो फिर आती हो सृष्टि पर पार्ट बजाने"। "ओम्" अर्थात् "आत्मा" ही यहां दुनिया में "देवता, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र बनते हैं"। "ओम् अर्थात् हम आत्मा"। कितना फ़र्क है? वह फिर दोनों को एक कर देते हैं। यह बुद्धि से समझने की बातें हैं। "तुम तो जानते हो- आत्मा अविनाशी है, शरीर विनाशी है"। "कलियुगी नर्कवासी मनुष्यों को देखने और तुम्हारे देखने में भी रात-दिन का फ़र्क हो जाता है"। "हम आत्मा बाप द्वारा पढ़ते हैं, यह कोई को पता नहीं"। "ज्ञान सागर परमपिता परमात्मा यहां आकर पढ़ाते हैं"। हम "आत्मा" सुन रही हैं। अपने को "आत्मा" समझ बाप "परमात्मा" को याद करने से विकर्म विनाश होंगे। तुम्हारी बुद्धि ऊपर चली जाएगी। "शिवबाबा हमको नॉलेज सुना रहे हैं, इसमें बहुत रिफाइन बुद्धि चाहिए"। "रिफाइन बुद्धि करने के लिए बाप युक्ति बताते हैं की अपने को आत्मा समझने से बाप जरूर याद आएगा"। अपने को "आत्मा" समझते ही इसलिए हैं की बाप याद पड़े, शिवबाबा से संबंध जुटा रहे जो सारा कल्प टूटा है। "वहां सतयुग में तो है प्रालब्ध सुख ही सुख, दु:ख की बात नहीं"। उनको "हेवन" कहते हैं। "हेवनली गॉड फादर शिवबाबा ही हेवन का मालिक बनाते हैं"। ऐसे बाप को भी तुम कितना भूल जाते हैं? बाप यहां आकर बच्चों (ब्रह्मावत्सों) को एडॉप्ट करते हैं। अच्छा। (10.10.2025)