У нас вы можете посмотреть бесплатно आरोग्य, तेज, यश व पितृदोष-नाशक मौलिक सूर्य स्तुति | नेत्र व हृदय रोग लाभ | लेखरंजन или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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इस अति दुर्लभ सूर्य स्तुति का नियमित पाठ करने से— 🔸 शारीरिक आरोग्य में वृद्धि 🔸 तेज, आत्मविश्वास व यश की प्राप्ति 🔸 पितृ-दोष का शमन व पितृ-तृप्ति 🔸 नेत्र रोग एवं हृदय संबंधी विकारों में विशेष लाभ 🔸 मानसिक बल व सकारात्मक ऊर्जा की वृद्धि विशेष अनुशंसा: प्रातः सूर्योदय के समय, पूर्व दिशा की ओर मुख करके तांबे के पात्र से जल अर्घ्य देकर इस स्तुति का पाठ करें। 7, 12 या 21 दिनों का नियमित पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है। 🙏 यह स्तुति श्रद्धा व विश्वास के साथ करें। 🏷️ #सूर्यस्तुति #SuryaStotra #आरोग्यप्राप्ति #पितृदोषनाश #नेत्ररोगउपाय #हृदयरोगउपाय #सूर्यउपासना #सनातनधर्म #लेखरंजन #MorningPrayer #AdityaUpasana __ श्रीसूर्य आरोग्य–तेज–पितृदोष-शमन स्तुतिः (रचयिता — लेखरंजन)) ध्यानम् ॐ अरुणारुणवर्णाय सहस्रांशुप्रकाशिने। तेजोराशे जगन्नाथ सूर्याय नमो नमः॥ स्तुतिः ॐ नमो भास्कराय त्वां वन्दे लेखरंजनकृतस्तुत्या। आरोग्यं देहि देहे मे नाशय रोगसञ्चयम्॥ नेत्रज्योतिर्विवर्धस्व हृदयस्थैर्यदायक। तमोहर नमस्तुभ्यं सूर्य देव दिवाकर॥ यशःकीर्तिप्रदं तेजः पुरुषार्थप्रकाशकम्। कुरु मे जीवनं सिद्धं भानुर्लोकरविप्रभ॥ पितॄणां तृप्तिदो देव पितृदोषविनाशक। श्राद्धतर्पणसन्तुष्ट सूर्य त्वं शरणं मम॥ रक्तधातुविकारांश्च हृदयव्याधिनाशन। सप्ताश्वरथसंयुक्त नमस्ते लोकपूजित॥ मनोबलप्रदं नित्यं आत्मविश्वासवर्धन। आदित्य त्वं प्रसन्नो मे कुरु सौख्यं निरामयम्॥ प्रज्ञां बुद्धिं च मे देहि दृष्टिदोषहर प्रभो। लेखरंजनवाक्येन स्तुतोऽसि वरदायक॥ उदयाचलसंभूतो अस्ताचलविहारक। त्रिकालपूज्य सूर्येश पापघ्न नमोऽस्तु ते॥ __ ☀️ सूर्य स्तुति पाठ-विधि (आरोग्य, तेज, यश व पितृदोष-शमन हेतु) 1️⃣ समय (काल) सर्वश्रेष्ठ: प्रातः सूर्योदय के समय विशेष फलदायी: रविवार, सप्तमी तिथि, माघ मास अनुष्ठान हेतु: 7, 12 या 21 दिवस निरंतर 2️⃣ दिशा व आसन दिशा: पूर्वाभिमुख होकर आसन: कुशासन / लाल या पीला वस्त्र 3️⃣ सामग्री ताँबे का पात्र शुद्ध जल (गंगाजल हो तो श्रेष्ठ) लाल पुष्प अक्षत (चावल) रोली / चंदन 4️⃣ संकल्प दाएँ हाथ में जल, पुष्प व अक्षत लेकर संकल्प करें— “मम (अपने/परिवार के नाम) आरोग्य, तेज, यश-वृद्धि, पितृदोष-शमन तथा नेत्र-हृदय रोग निवारणार्थ श्रीसूर्यदेव प्रीत्यर्थं लेखरंजनकृता सूर्यस्तुतिपाठं करिष्ये।” 5️⃣ अर्घ्य-विधि ताँबे के पात्र से सूर्य को जल अर्पित करें अर्घ्य देते समय जप करें— ॐ घृणि सूर्याय नमः (3, 7 या 11 बार) 6️⃣ स्तुति-पाठ शांत चित्त से पूरी सूर्य स्तुति का 1 बार पाठ आवश्यकता हो तो 3 या 7 बार 7️⃣ ध्यान पाठ के बाद 1–2 मिनट सूर्य मंडल का ध्यान तेजस्वी प्रकाश को हृदय व नेत्रों में अनुभव करें 8️⃣ समापन सूर्यदेव से क्षमा-प्रार्थना व फल-प्राप्ति की कामना पितृदोष शमन हेतु अंत में कहें— “एषोऽर्घ्यः सूर्यदेवाय पितृभ्यश्च नमो नमः।” 🌼 विशेष नियम ✔️ ब्रह्मचर्य व सात्त्विक आहार ✔️ क्रोध व असत्य से बचें ✔️ रविवार को तामसिक भोजन न करें 🌞 विशेष फल 7 दिन — मानसिक व शारीरिक ऊर्जा 12 दिन — नेत्र व हृदय में लाभ 21 दिन — पितृदोष शमन व यश-वृद्धि।