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योगसूत्र समाधि पाद – सूत्र 1.17 और 1.18 इस ध्यान में हम अनुभव करते हैं: 🔹 “वितर्कविचारानन्दास्मितारूपानुगमात् सम्प्रज्ञातः” → सम्प्रज्ञात समाधि की चार अवस्थाएँ — वितर्क, विचार, आनन्द और अस्मिता 🔹 “विरामप्रत्ययाभ्यासपूर्वः संस्कारशेषोऽन्यः” → असम्प्रज्ञात समाधि — जहाँ विचार पूर्ण विराम में विलीन हो जाते हैं यह केवल दार्शनिक व्याख्या नहीं, बल्कि एक *अनुभवात्मक ट्रान्स साधना* है — जहाँ आप स्थूल विचारों से सूक्ष्म चेतना तक यात्रा करते हैं। इस 60 मिनट की गहन साधना में: ✨ मन की शुद्धि ✨ संस्कारों की हीलिंग ✨ साक्षीभाव की स्थापना ✨ विराम की गहन अनुभूति यह ध्यान उन साधकों के लिए है जो केवल ध्यान नहीं करना चाहते, बल्कि *समाधि की दिशा में सचेत कदम रखना चाहते हैं।* --- 🌿 संदेश समाधि अचानक नहीं आती। विचार से विराम तक की यात्रा अभ्यास और सजगता से ही संभव है। 🔔 यदि यह ध्यान आपको भीतर तक स्पर्श करे, तो अपनी अनुभूति कमेंट में साझा करें। चैनल को सब्सक्राइब करें। Tags योगसूत्र 1.17, # योगसूत्र 1.18, # समाधि पाद, # सम्प्रज्ञात समाधि, # असम्प्रज्ञात समाधि, # ट्रान्स ध्यान, # गहन ध्यान साधना, # पतंजलि योगदर्शन, # संस्कार शुद्धि, # साक्षीभाव, # Sudhi Gyan Sadhana