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तानपुरा भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण वाद्य यंत्र है, जिसका मुख्य कार्य गायन या वादन के साथ निरंतर स्वर–आधार (श्रुति और नाद) प्रदान करना होता है। जब हम “F# तानपुरा” की बात करते हैं, तो इसका अर्थ है कि तानपुरा का मूल स्वर (सा) F# अर्थात फ़ा शार्प पर स्थापित किया गया है। यह किसी विशेष गायक, वादक या राग की आवश्यकतानुसार चुना जाता है, क्योंकि हर कलाकार अपनी सुविधा और कंठ–सीमा के अनुसार तानपुरा की श्रुति तय करता है। तानपुरा में सामान्यतः चार या पाँच तार होते हैं। चार तारों वाले तानपुरा में क्रमशः “प, सा, सा, सा” या “म, सा, सा, सा” का स्वर संयोजन रखा जाता है। जब तानपुरा F# पर सेट किया जाता है, तो इसका अर्थ होता है कि “सा” का स्वर F# बनता है और उसी के अनुसार “प” या “म” का स्वर निर्धारित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि F# को सा माना जाए, तो प का स्वर C# होगा। यह स्थिर, निरंतर गूँजता हुआ स्वर गायन या वादन के लिए आधार तैयार करता है। तानपुरा का स्वर–उत्पादन अत्यंत विशिष्ट होता है। इसके तारों के नीचे जावा (ब्रिज) की हल्की वक्रता के कारण ध्वनि में झंकार और लहर पैदा होती है, जिसे “जवारी” कहा जाता है। यही जवारी तानपुरा की आत्मा मानी जाती है। F# तानपुरा में भी यही गुण रहता है, केवल स्वर की ऊँचाई बदल जाती है। ऊँचे स्वर पर सेट तानपुरा प्रायः पुरुष गायकों या ऊँची कंठ–सीमा वाले कलाकारों के लिए उपयोगी होता है। तानपुरा का महत्व केवल संगत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राग की शुद्धता बनाए रखने में भी सहायक होता है। जब गायक F# तानपुरा के साथ अभ्यास या प्रस्तुति करता है, तो उसके कान लगातार उसी स्वर–मंडल में रमे रहते हैं। इससे सुर की स्थिरता, राग की पहचान और स्वर–शुद्धता बनी रहती है। यह कहा जाता है कि तानपुरा गुरु के समान होता है, क्योंकि वह निरंतर सही मार्ग दिखाता है। आधुनिक समय में इलेक्ट्रॉनिक तानपुरा और डिजिटल ऐप्स भी उपलब्ध हैं, जिनमें F# सहित सभी स्वरों पर आसानी से तानपुरा सेट किया जा सकता है। फिर भी पारंपरिक लकड़ी का तानपुरा आज भी विशेष आदर और महत्व रखता है। इसके शरीर का निर्माण आमतौर पर तुम्बा (कद्दू) या लकड़ी से किया जाता है, जिससे ध्वनि गहरी और मधुर बनती है। संक्षेप में, F# तानपुरा कोई अलग वाद्य नहीं बल्कि उसी तानपुरा का एक स्वर–रूप है, जिसे F# पर ट्यून किया गया होता है। यह कलाकार की कंठ–सीमा, राग की प्रकृति और प्रस्तुति की सुविधा के अनुसार चुना जाता है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में तानपुरा के बिना राग की कल्पना अधूरी मानी जाती है, और F# तानपुरा उसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। #संगीत #संगीतप्रेमी #म्यूजिक #म्यूजिकलीवर #म्यूजिकटीचर #म्यूजिकक्लास #म्यूजिकस्कूल #म्यूजिकस्टूडेंट #म्यूजिकट्रेनिंग #म्यूजिकएजुकेशन