У нас вы можете посмотреть бесплатно 🧘🧘मायाजीत, विजयी स्थिति की अनुभूति # मुरली वरदान или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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#bk #guidedmeditation #bkmeditation #angel #guided #meditation #meditationaudio #meditationtechniques #motivation 🧘 राजयोग मेडिटेशन कमेंट्री यहाँ प्रस्तुत है। आज के वरदान पर आधारित अभ्यास 06-02-2026 *मायाजीत, विजयी स्थिति * (गहरी श्वास लें... शरीर को ढीला छोड़ें... और अपना पूरा ध्यान मस्तक के बीच चमकती हुई मणि 'आत्मा' पर एकाग्र करें...) मैं एक चमकती हुई दिव्य शक्ति... आत्मा हूँ। इस देह की दुनिया से न्यारी... प्रभु प्रेम में प्यार में समाई हुई... महसूस कर रही हूं...। मैं अपने मन और बुद्धि को चारों तरफ से समेट कर... अंतर्मुखी हो गई हूँ...। अब मैं अपनी बुद्धि रूपी नेत्र से... अपने दिल रूपी सिंहासन को देख रही हूँ। चेक करें... इस दिल में कौन है...? क्या कोई देहधारी है?... क्या कोई पुरानी बातें हैं?... या कोई व्यर्थ संकल्प? नहीं... मेरे दिल में सिवाय बाबा के और कोई नहीं। "एक बाबा... दूसरा न कोई।" जैसे हनुमान ने सीना चीर कर राम दिखाया... वैसे ही मेरी हर धड़कन में, हर संकल्प में, सिर्फ मेरा बाबा समाया है। मेरा दिल एक स्वच्छ मंदिर है... जहाँ सिर्फ परमात्मा की मूर्ति स्थापित है। मैं इस विश्व मंच पर एक 'निमित्त' सेवाधारी हूँ...। मैं देख रही हूँ... मेरे द्वारा जो भी शुभ कर्म हो रहे हैं... जो भी सेवा हो रही है... उसे कराने वाला 'करावनहार' बाबा है। मैं तो सिर्फ करणहार हूँ... एक माध्यम हूँ। मेरे अंदर सादगी है... सरलता है... और बाबा पर अटूट विश्वास है। "बाबा, यह सब आपका है... आप ही करा रहे हैं।" इस भाव ने मुझे हर बोझ से हल्का कर दिया है। मेरे अंदर जो भी गुण हैं, जो भी विशेषताएँ हैं... यह मेरा नहीं... यह 'प्रभु प्रसाद' है। मैं इस प्रसाद को विश्व कल्याण के लिए समर्पित करती हूँ। मैं-पन का भान... कि "मैंने किया, मैं ही कर सकती हूँ"... इस अभिमान की पूंछ को मैं योग की अग्नि में जला रही हूँ। देखें... जैसे ही मेरा मैं-पन खत्म हुआ... माया की लंका अपने आप जल रही है... विघ्न समाप्त हो रहे हैं। मैं स्वयं शीतल हूँ... शांत हूँ... सुरक्षित हूँ। अब बापदादा का वरदान मेरे मस्तक पर चमक रहा है... "बच्चे! तुम सदा मायाजीत हो... विजयी भव हो।" मेरा स्वभाव निर्मान है... मेरी भावना निर्मल है। बापदादा की छत्रछाया मेरे साथ है। स्व-परिवर्तन से मैं विश्व-परिवर्तन का आधार बन गई हूँ। मैं विजयी थी... मैं विजयी हूँ... और सदा विजयी रहूँगी। ॐ शान्ति... शान्ति... शान्ति... ईश्वरीय सेवा में, बी के अशोक भाई, वृति प्रोजेक्ट ज्ञानामृत प्रिटिंग प्रेस, शांतिवन https://chat.whatsapp.com/DjmiHp9Jfbp... https://t.me/+KDBe-VQeJKIzZjY1 plz like, subscribe and share this video 🙏🙏☀️☀️🧘🧘 bkkumari2860@gmail.com