У нас вы можете посмотреть бесплатно मेरे आठवें ज्योतिर्लिंग दर्शन !घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद में एल्लोरा गुफा के बिल्कुल निकट स्थित हैं। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं जोकि भगवान शिव को समर्पित हैं और यह दर्शनीय स्थान यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल हैं। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की यात्रा के दौरान पर्यटकों को एक परमसुख की अनुभूति होती हैं। घृष्णेश्वर मंदिर 13 वीं शताब्दी के दौरान का शिव मंदिर हैं, जोकि एलोरा गुफा में स्थित हैं। घृष्णेश्वर मंदिर को घुश्मेस्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता हैं। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की स्थापना की वास्तविक तिथि ज्ञात नही हैं, लेकिन इस मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि यह मंदिर 13 वीं शताब्दी से भी पहले निर्मित किया गया था। मुगल साम्राज्य के दौरान यह मंदिर बेलूर क्षेत्र में स्थित था, जिसे वर्तमान में एल्लोरा केव्स के रूप में जाना जाता हैं। मंदिर के आसपास के क्षेत्र में 13 वीं और 14 वीं शताब्दी के बीच कुछ विनाशकारी हिंदू-मुस्लिम संघर्ष देखे गए हैं, जिसमे यह मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था। 16 वीं शताब्दी के दौरान बेलूर के प्रमुख के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज के दादा मालोजी भोसले ने इस मंदिर को दोबारा निर्मित करवाया था। हालाकि 16 वीं शताब्दी के बाद मुगल सेना ने घृष्णेश्वर मंदिर पर कई हमले किए। 1680 और 1707 के दौरान हुए मुगल मराठा युद्ध में यह मंदिर फिरसे क्षतिग्रस्त हुआ और अंतिम बार इसका पुनर्निर्माण 18 वीं शताब्दी में इंदौर की महारानी रानी अहिल्या बाई ने करबाया था। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी : घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी पति पत्नी के जोड़े सुधर्मा और सुदेहा की कहानी से शुरू होती हैं। दोनों अपने विवाहिक जीवन में खुश थे, लेकिन वह संतान सुख की प्राप्ति से वंचित थे और सुदेहा कभी माँ नही बन सकती है यह प्रमाणित हो चुका था। इसलिए सुदेहा ने अपनी छोटी बहन घुश्मा के साथ अपने अपने पति सुधर्मा का विवाह करवा दिया। समय व्यतीत होने लगा और घुश्मा के गर्व से एक खूबसूरत बालक ने जन्म लिया। लेकिन धीरे-धीरे अपने हाथ से पति, प्रेम, घर-द्वारा, मान-सम्मान को छिनते हुए देख सुदेहा के मन में ईर्ष्या के बीज अंकुरित होने लगे और एक दिन उसने मौका देखकर बालक की हत्या कर दी और उसके सव को उसी तालाब में डाल दिया जिसमे घुश्मा भगवान शिव के शिवलिंग का विसर्जन करती थी। सुधर्मा की दूसरी पत्नी घुश्मा जोकि भगवान शिव की परम भक्त थी नित्य प्रतिदिन सुबह उठकर भगवान शिव के 101 शिवलिंग बनाकर पूजन करती और फिर एक तालाब में डाल देती थी। बालक की खबर सुनकर चारो ओर हाहाकार मच गया लेकिन घुश्मा प्रतिदिन की तरह उस दिन भी भगवान शिव के शिवलिंग बनाकर शांत मन से पूजन करने में लगी रही और जब वह शिवलिंग को तालाब में विसर्जन करने के लिए गई तो उसका पुत्र तालाब से जीवित बाहर निकल आया। साथ ही साथ भगवान शिव ने भी घुश्मा को दर्शन दिए, भोलेनाथ सुदेहा की इस हरकत से रुस्ट थे उसे दंड और घुश्मा को वरदान देना चाहते थे। लेकिन घुश्मा ने सुदेहा को माफ़ करने के लिए विनती की और जन कल्याण के लिए शंकर भगवान से यही निवास करने की प्रार्थना की। घुश्मा की विनती स्वीकार करके भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में यही निवास करने लगे और यह स्थान घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में दुनिया में प्रसिद्ध हुआ। शिरडी से घृष्णेश्वर की दूरी – शिरडी से घृष्णेश्वर की दूरी लगभग 95 किलोमीटर हैं। घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर खुलने और बंद होने का समय - घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर सुबह 5:30 बजे खुलता हैं और शाम को 9 बजे बंद हो जाता हैं। हालाकि श्रवण माह में (अगस्त से सितम्बर माह) में सुबह 3 बजे से रात के 11 बजे तक मंदिर यहां आने वाले भक्तो के लिए खुला रहता हैं। AK TRAVEL VLOGS HAR HAR MAHADEV