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🌺भगवान स्वामीनारायण द्वारा उच्चारित वचनामृत 74 हमें जीवन के सबसे गहरे सत्य से परिचित कराता है— 'ईश्वरीय इच्छा के प्रति पूर्ण समर्पण'। श्रीजी महाराज समझाते हैं कि व्यक्ति के वैराग्य और उसकी समझ की वास्तविक परीक्षा केवल सुख के समय नहीं, बल्कि संकट के समय होती है। जिस प्रकार एक सूखा पत्ता स्वयं की गति का त्याग कर पूरी तरह वायु के अधीन हो जाता है, उसी प्रकार एक सच्चे भक्त को अपनी इच्छाओं का त्याग कर स्वयं को परमात्मा के चरणों में समर्पित कर देना चाहिए। चाहे जीवन में अपार संपत्ति आए या भीषण विपत्ति, भक्त का मन स्थिर रहना चाहिए। महाराज कहते हैं कि यदि भगवान हमें हाथी पर बैठाएं (सम्मान दें) या गधे पर बैठाएं (अपमान दें), हमें दोनों स्थितियों में समान रूप से प्रसन्न रहना चाहिए। सत्संग की प्रगति हो या उसमें रुकावट आए, हमें विचलित होने के बजाय इसे भगवान की मर्जी मानकर स्वीकार करना चाहिए। सारांश यह है कि मन में किसी भी प्रकार का उद्वेग, हर्ष या शोक रखे बिना, केवल भगवान के भजन में मग्न रहना ही एक सच्चे सत्संगी का परम धर्म है। SEO के लिए मुख्य बिंदु (Keywords) वचनामृत 74 हिंदी व्याख्या (Vachanamrut 74 Hindi) भगवान की इच्छा और समर्पण (God's Will and Surrender) श्रीजी महाराज के अनमोल वचन (Shreeji Maharaj Quotes) संकट में धैर्य और सत्संग (Patience in Crisis and Satsang) स्वामी स्वामीनारायण की शिक्षाएं #वचनामृत #Vachanamrut #स्वामीनारायण #Satsang #Spirituality #HindiQuotes #BhagwanSwaminarayan #BAPS #धार्मिकज्ञान #ईश्वरभक्ति #PositiveThinking #LifeLessons