У нас вы можете посмотреть бесплатно 1 सेकंड भी नाम जप मत भूलना, फिर देखो क्या होता है तुम्हारे साथ ! // Shri Hit или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
1 सेकंड भी नाम जप मत भूलना, फिर देखो क्या होता है तुम्हारे साथ ! // Shri Hit #motivation #parmanand Option 1 (Simple & Powerful) “1 सेकंड भी नाम जप मत भूलना… फिर देखो क्या होता है तुम्हारे साथ!” 🙏✨ — Shri Hit Premanand Ji Maharaj Option 2 (More Viral Feel) “नाम जप चलता रहे बस… बाक़ी सब अपने आप ठीक हो जाएगा।” 🔥 #ShriHit #PremanandJi #Bhakti Option 3 (Reel Hook Style) “सोच बदलनी है? बस 1 सेकंड भी नाम जप मत छोड़ना।” 🌼 #Motivation #Bhajan #Sanatan #ViralVideo Suggested Hashtags (mix & match) #ShriHit #PremanandJiMaharaj #NaamJap #BhaktiReels #SanatanDharm #KrishnaBhakti #MotivationHindi #ViralReel ज़रूर 🙏 नीचे दिए गए वाक्य — “1 सेकंड भी नाम जप मत भूलना, फिर देखो क्या होता है तुम्हारे साथ!” — Shri Hit Premanand Ji Maharaj — का भावार्थ, प्रभाव और आध्यात्मिक गहराई लगभग 1000 शब्दों में समझाया गया है। नाम जप का महत्व: एक साधारण वाक्य, गहरा रहस्य यह वाक्य सुनने में बहुत साधारण लगता है, लेकिन इसके भीतर संपूर्ण भक्ति योग, मन की साधना, और जीवन परिवर्तन का रहस्य छिपा है। Shri Hit Premanand Ji Maharaj जैसे संत जब ऐसा वाक्य कहते हैं, तो वह केवल उपदेश नहीं होता, बल्कि स्वयं के अनुभव से निकला हुआ सत्य होता है। “नाम” — यानी ईश्वर का नाम। “जप” — यानी उस नाम का निरंतर स्मरण। यहाँ बात किसी विशेष विधि, कठिन तपस्या या बड़े कर्मकांड की नहीं है। केवल इतना कहा गया है कि एक सेकंड के लिए भी नाम जप को मत भूलो। नाम जप क्या है? नाम जप का अर्थ है — ईश्वर के नाम को मन, वाणी या हृदय में लगातार दोहराना। यह नाम कोई भी हो सकता है — राम, कृष्ण, राधे, शिव, नारायण — क्योंकि नाम से बड़ा भाव होता है। नाम जप का असली उद्देश्य है: मन को इधर-उधर भटकने से रोकना अहंकार को धीरे-धीरे गलाना और अपने को ईश्वर की शरण में सौंप देना जब नाम जप चलता रहता है, तो मन नकारात्मक विचारों में डूबने की बजाय एक उच्च चेतना से जुड़ा रहता है। “1 सेकंड भी मत भूलना” — इसका गहरा अर्थ यहाँ “1 सेकंड” समय की मात्रा नहीं, बल्कि निरंतरता (Continuity) का प्रतीक है। संत कहना चाहते हैं कि: दुख में भी नाम सुख में भी नाम अपमान में भी नाम सम्मान में भी नाम जब नाम जप परिस्थिति पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि स्वभाव बन जाता है — तभी असली साधना शुरू होती है। हम अक्सर भगवान को तभी याद करते हैं जब परेशानी आती है। लेकिन जैसे ही समस्या हल होती है, नाम छूट जाता है। यही कारण है कि जीवन बार-बार वही चक्र दोहराता है। “फिर देखो क्या होता है तुम्हारे साथ” — क्या सच में कुछ होता है? हाँ, बहुत कुछ होता है — लेकिन वह चमत्कार फिल्मी नहीं, अंदरूनी होता है। मन शांत होने लगता है जो बात पहले परेशान करती थी, वह अब उतनी भारी नहीं लगती। सोच का स्तर बदलता है व्यक्ति प्रतिक्रिया देना छोड़कर समझदारी से उत्तर देने लगता है। भय कम होने लगता है क्योंकि नाम जप के साथ यह भाव आता है कि “मैं अकेला नहीं हूँ।” क्रोध और अहंकार कमजोर पड़ते हैं नाम जप अहंकार का सबसे बड़ा शत्रु है। जीवन की दिशा बदलने लगती है निर्णय अधिक शुद्ध और सही होने लगते हैं। नाम जप और कर्म बहुत लोग पूछते हैं — “सिर्फ नाम जप से क्या होगा? कर्म तो करने ही पड़ते हैं।” यह सत्य है कि कर्म आवश्यक हैं, लेकिन नाम जप कर्मों की दिशा सुधार देता है। नाम जप करने वाला व्यक्ति: गलत कर्म से पहले सोचता है किसी को धोखा देने से पहले रुकता है और दूसरों के दुख को समझने लगता है इस तरह नाम जप धीरे-धीरे कर्म शुद्धि का माध्यम बन जाता है। कलियुग में नाम जप का विशेष महत्व शास्त्रों में कहा गया है कि: कलियुग केवल नाम के सहारे पार हो सकता है। आज के समय में: मन बहुत अशांत है समय बहुत कम है और जीवन बहुत तेज़ है ऐसे में कठिन साधनाएँ हर किसी के लिए संभव नहीं। लेकिन नाम जप — चलते-फिरते काम करते हुए यहाँ तक कि सांसों के साथ भी किया जा सकता है। इसलिए संत बार-बार नाम जप पर ज़ोर देते हैं। Shri Hit Premanand Ji Maharaj की शिक्षाओं का सार Premanand Ji Maharaj हमेशा कहते हैं कि: भक्ति दिखावे की नहीं होती सच्ची भक्ति भीतर चलती है और नाम जप उसका मूल है उनका यह वाक्य डराने के लिए नहीं है, बल्कि जगाने के लिए है। “फिर देखो क्या होता है” — यह एक चुनौती नहीं, बल्कि निमंत्रण है — अनुभव करने का। निष्कर्ष यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि: ईश्वर दूर नहीं है हमें उसे खोजने कहीं जाना नहीं बस नाम को थामे रखना है अगर सच में जीवन में शांति, स्थिरता और सच्चा आनंद चाहिए — तो कोई बड़ा चमत्कार नहीं, बस इतना काफ़ी है: “1 सेकंड भी नाम जप मत भूलना…” बाक़ी सब अपने आप घटित होता चला जाएगा 🙏✨