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🙏🪷हे नाथ ! हे मेरे नाथ ! मैं आपको भूलूँ नहीं🪷🙏 ॥ श्रीहरि: ॥ दिनांक 9.2.26. वि. सं. 2082, 'कालयुक्त' संवत्सर, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, अष्टमी, सोमवार। (गीता दैनन्दिनी अनुसार)। परम श्रद्धेय स्वामीजी श्री रामसुखदास जी महाराजका प्रवचन— दिनांक— 25.11.1996, प्रातः 5.18 बजे। स्थान— विराटनगर, नेपाल। ⚜️ साधन संबंधी खास बात बताई जाती है, जैसे आप सब यहाँ आये हैं, बैठे हैं, बैठनेकी सब सुख-सुविधा भी है, लेकिन भीतरमें एक बात जँची हुई है कि यहाँ हम सदा रहने वाले नहीं हैं, समय होते ही यहाँसे जाना हैं। जैसे यहाँ इस बातको माना है, वैसे ही अपने-अपने घरोंमें रहते हुए भी कृपा करके इस बातको मान लें कि आपको वहाँ सदा नहीं रहना है, वहाँ आये हैं और समय होते ही वहाँसे जाना पड़ेगा। दिखनेमें यह बात छोटी-सी दिखती है, लेकिन ऐसी जाग्रति रहे तो बहुत लाभकी बात है। ⚜️ ऐसी जाग्रति रहे तो असली लाभकी तरफ चल पड़ते हैं, इतने मात्रसे हमारी गति परमात्माकी तरफ हो जाती है। जितना-जितना अपनेको संसारमें स्थाई मानते हैं, उतनी संसारकी तरफ, जन्म-मरणकी तरफ गति है। जैसे आप अपनेको अमुक-अमुक नाम वाला मानते हैं, इसे याद नहीं करना पड़ता है, लेकिन इसमें भूली होती ही नहीं है। कोई आपका नाम नहीं पूछे तो महिनों तक भी इधर दृष्टि नहीं जाती है, लेकिन ऐसी जाग्रति हर समय रहती है कि मेरा अमुक-अमुक नाम है। ⚜️ शंका— अनुकूलता-प्रतिकूलता का हमारे ऊपर असर पड़ जाता है, इसका निवारण कैसे करें? समाधान— 'आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत।' अनुकूलता, प्रतिकूलता आने-जाने वाली और अनित्य हैं और आप सदा रहने वाले हैं, इसलिए आप इनको सह लें। 'सुख हरषहिं जड़ दुख बिलखाहीं। दोउ सम धीर धरहिं मन माहीं॥' सबका अनुभव है कि अनुकूलता, प्रतिकूलता आती-जाती हैं, इनकी क्या चिन्ता करें। जिस क्षण अनुकूल, प्रतिकूल परिस्थिति आई, उसी क्षण इनका वियोग होना शुरू हो गया। संयोगका तो वियोग होता है, लेकिन वियोगका संयोग होगा, यह नियम नहीं है। कोई शरीर कितना रहेगा, इसमें तो सन्देह है, लेकिन मरना अवश्य है, इसमें सन्देह है ही नहीं; इस तरह सच्ची बातको जान लेना ही ज्ञान है। ⚜️ प्रश्न— परिजनों की मृत्यु का शोक कैसे मिटे? समाधान— जो व्यक्ति मर गया, उसे भगवान् के धाममें देखें। गरीब घरके बालकोंको मिठाई दो, गायोंको घास दो, भूखोंको अन्न दो, अभावग्रस्तोंकी सेवा करो— इस तरह करनेसे दुःख, शोक मिट जाता है। मनमें उससे सुख लेनेकी आशा रहनेसे दुःख होता है, कोई लम्बे समयसे बिमार हो और उसका शरीर चला जाय तो उसका इतना दुःख नहीं होता है। 🌷🌷🌷🌷🌷 #कैलाशजीमहाराज #आध्यात्मिकप्रवचन #प्रवचन #swamiramsukhdasji #गीता_भवन_ऋषिकेश #ganga #rishikeshsatsang #कैलाशजीमहाराज#sadhaksanjeevani #sadhakokisanjivani #गीता_भवन_ऋषिकेश #सत्संग #प्रवचन #भक्ति #श्रीमद्भगवद्गीता #हेनाथ #मैंआपकोभूलूनहीं #संतवाणी #आध्यात्मिकप्रवचन #SanatanDharma #RishikeshSatsang #SwamiRamsukhdasji