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🙏🪷हे नाथ ! हे मेरे नाथ ! मैं आपको भूलूँ नहीं🪷🙏 ॥ श्रीहरि: ॥ दिनांक 4.2.26. वि. सं. 2082, 'कालयुक्त' संवत्सर, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, तृतीया, बुधवार। (गीता दैनन्दिनी अनुसार)। परम श्रद्धेय स्वामीजी श्री रामसुखदास जी महाराजका प्रवचन— दिनांक— 10.10.1996, प्रातः 5.18 बजे। स्थान— हाड़ा कुटीर, वृन्दावन। ⚜️ वास्तवमें एक परमात्माके सिवाय अपना कोई नहीं है। कुटुम्ब, धन, वैभव, शरीर, इन्द्रियाँ, अन्तःकरण आदि कुछ भी अपने नहीं है। 'मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई।' मीरां बाईका यह सिद्धांत बहुत बढ़िया है। 'एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास। एक राम घनस्याम हित, चातक तुलसीदास॥' परमात्मा सब देशमें होनेसे यहाँ है, सब कालमें होनेसे अभी है, सबमें होनेसे हमारेमें भी है, सबके होनेसे हमारे भी हैं। एक-एक भाई परमात्माको अपना कह सकता है, भगवान् के समान हित करने वाला दूसरा कोई नहीं है। ⚜️ प्रत्यक्ष बात है कि जिन्हें हम अपना मानते हैं, आजसे सौ वर्ष पहले वे अपने थे? क्या सौ वर्ष बादमें वे अपने रहेंगे? और वर्तमानमें भी प्रतिक्षण हमारेसे अलग हो रहे हैं। 'दो बातन को भूल मत जो चाहत कल्यान। नारायन इक मौत को दुजे श्रीभगवान्॥' इसीलिए सन्त-महात्मा कहते हैं कि शरीर-संसार आज तक किसीको मिला नहीं है, मिलेगा नहीं, मिल सकता ही नहीं। जैसे गंगाजीका प्रवाह निरन्तर बह रहा है, ऐसे संसारका प्रवाह प्रतिक्षण अभावकी तरफ जा रहा है, लेकिन परमात्मा कभी किसीका साथ छोड़ते ही नहीं, कभी बदलते ही नहीं। ⚜️ बदलने वाले शरीरकी एकता बदलने वाले संसारके साथ है और कभी नहीं बदलने वाले स्वयंकी (स्वरूपकी) एकता कभी नहीं बदलने वाले परमात्माके साथ है। भगवान् और आप रहने वाले हैं एवं शरीर और संसार जाने वाले हैं। संसारका वियोग नित्य है और परमात्माका योग नित्य है। अप्राप्त शरीर-संसारको प्राप्त समझ रहे हैं और नित्य प्राप्त परमात्माको अप्राप्त (दूर) समझ रहे हैं— सत्संगमें इस गलत मान्यताका त्याग करना है। 'काल चिरैया चुग रही निश दिन आयु खेत।' ⚜️ 'नारायण बृजराज कुँवर सूँ बेगि हि कर पहचान।' सज्जनों, समय तेजीसे जा रहा है, मरना कोई नहीं चाहता, वह मरनेका दिन निरन्तर नजदीक आ रहा है। वह दिन कब आएगा, जब इस बात पर विचार करेंगे, इस मनुष्य शरीरमें ही इस बात पर विचार करनेका मौका है। चाहे बालक हो, वृद्ध हो, चाहे माँ के पेटमें हो, काल सबको तेजीसे खा रहा है। सिवाय परमात्माके और कोई सहारा नहीं है, इसलिए भगवान् के भजनमें लगनेकी बड़ी आवश्यकता है। प्रतिक्षण भगवान् को पुकारो— हे नाथ, हे मेरे नाथ, मैं आपको भूलूँ नहीं। 🌷🌷🌷🌷🌷 #कैलाशजीमहाराज #आध्यात्मिकप्रवचन #प्रवचन #swamiramsukhdasji #गीता_भवन_ऋषिकेश #ganga #rishikeshsatsang #कैलाशजीमहाराज#sadhaksanjeevani #sadhakokisanjivani #गीता_भवन_ऋषिकेश #सत्संग #प्रवचन #भक्ति #श्रीमद्भगवद्गीता #हेनाथ #मैंआपकोभूलूनहीं #संतवाणी #आध्यात्मिकप्रवचन #SanatanDharma #RishikeshSatsang #SwamiRamsukhdasji