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🙏🪷हे नाथ ! हे मेरे नाथ ! मैं आपको भूलूँ नहीं🪷🙏 ॥ श्रीहरि: ॥ दिनांक 5.2.26. वि. सं. 2082, 'कालयुक्त' संवत्सर, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, गुरुवार। (गीता दैनन्दिनी अनुसार)। परम श्रद्धेय स्वामीजी श्री रामसुखदास जी महाराजका प्रवचन— दिनांक— 11.10.1996, प्रातः 5.18 बजे। स्थान— हाड़ा कुटीर, वृन्दावन। ⚜️ परमात्मा सबमें व्याप्त है तो अपनेमें भी है, सब जगह है तो यहाँ भी है, सब समयमें है तो अभी वर्तमानमें भी है; परमात्मा सबमें है, सब समयमें है, सबके भीतर है; ऐसे सर्वत्र परिपूर्ण परमात्माकी प्राप्तिमें परिश्रम, उद्योग नहीं है, केवल स्वीकार करना है, इस बात पर विश्वास करना है। बिषय करन सुर जीव समेता। सकल एक तें एक सचेता॥ सब कर परम प्रकासक जोई। राम अनादि अवधपति सोई॥ सर्वत्र परिपूर्ण परमात्माकी प्राप्तिके लिए काल, समय, वस्तु, गुरु, ग्रन्थकी अपेक्षा नहीं है। पापी-से-पापी और अशुद्ध-से-अशुद्ध जगहमें, स्वर्ग-नरकमें परमात्मा वैसे-के-वैसे हैं; केवल अपनी मान्यतामें कमी है। भगवान् सर्वसमर्थ हैं, लेकिन भगवान् की भी ताकत नहीं है कि वे हमारा त्याग कर दें। ⚜️ परमात्माको सब अपना कह सकते हैं, जैसे एक माँ के दस पुत्र हैं, तो ऐसा नहीं है कि हर पुत्रके माँ का दसवां हिस्सा आयेगा, पूरी-की-पूरी माँ दसों पुत्रोंकी है, ऐसे पूरे-के-पूरे परमात्मा हमारे सबके हैं। परमात्मा मान्यता करनेके अधीन नहीं है, परमात्म-तत्त्व निरपेक्ष है, परमात्माको मानें चाहे न मानें, स्वीकार करें चाहे न करें, वह तो सदासे है और सदा रहेंगे। परमात्मा हर दम मौजूद है, सबमें परिपूर्ण है, स्वत: सिद्ध है, स्वाभाविक है; अप्राप्ति हमारे मानी हुई है। ⚜️ परमात्मा कण-कणमें व्याप्त है— ऐसा कहनेमें आता है, वास्तवमें कण-कण नहीं है और परमात्मा सदा-सर्वदासे है। शरीर-संसारका वियोग नित्य है और परमात्माका योग नित्य है। नित्य प्राप्तको प्राप्त करना है और नित्य निवृत्तकी निवृत्ति करना है। सत्संग, सद्शास्त्रों के द्वारा परमात्माको कहींसे लाना नहीं है, निर्माण नहीं करना है, केवल इधर दृष्टि करना है। वास्तवमें तो एक परमात्मा ही है, देश, काल, वस्तु, व्यक्ति, पदार्थ, अवस्था, क्रिया आदि नहीं है। ⚜️ आपने जो असत् को सत्ता और महत्ता दे रखी है, यही परमात्मप्राप्तिमें बाधा है। इसमें सुगमता-कठिनता कहना बनता ही नहीं है, आपने कठिनता मान रखी है, इसलिए सुगम कहना पड़ता है, वरना जो तत्त्व नित्य प्राप्त है, उसमें क्या सुगमता और क्या कठिनता। 'मोर दास कहाइ नर आसा। करइ तौ कहहु कहा बिस्वासा॥' परमात्मामें सबकी स्थिति स्वाभाविक ही है, केवल उधर दृष्टि करना है। मुक्ति स्वाभाविक है, बन्धन कृत्रिम है, अपना बनाया हुआ है। 🌷🌷🌷🌷🌷 #कैलाशजीमहाराज #आध्यात्मिकप्रवचन #प्रवचन #swamiramsukhdasji #गीता_भवन_ऋषिकेश #ganga #rishikeshsatsang #कैलाशजीमहाराज#sadhaksanjeevani #sadhakokisanjivani #गीता_भवन_ऋषिकेश #सत्संग #प्रवचन #भक्ति #श्रीमद्भगवद्गीता #हेनाथ #मैंआपकोभूलूनहीं #संतवाणी #आध्यात्मिकप्रवचन #SanatanDharma #RishikeshSatsang #SwamiRamsukhdasji