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सेशन जज के बयान ने खोली नई परतें—संत रामपाल जी महाराज पर उठते सवालों के बीच सामने आया एक अलग सच देश में संत रामपाल जी महाराज को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। आरोप, मुक़दमे, अफ़वाहें और मीडिया ट्रायल—इन सबके बीच अब एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने चर्चा को नई दिशा दे दी है। यह बयान किसी आम व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक सेशन जज का है—जिन्होंने सार्वजनिक रूप से संत रामपाल जी महाराज के बारे में अपने अनुभव और विचार साझा किए हैं। जज का कहना है कि उन्होंने संत रामपाल जी महाराज के बारे में वही सुना था, जो आमतौर पर समाज और मीडिया में फैलाया गया। लेकिन जब उन्होंने स्वयं शास्त्रों के संदर्भ, सत्संग की सामग्री और व्यवहारिक बदलावों को गहराई से देखा, तो तस्वीर एकदम अलग नज़र आई। सेशन जज के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान भावनाओं पर नहीं, बल्कि ग्रंथों के प्रमाण पर आधारित है। उन्होंने बताया कि सत्संग में कही जाने वाली बातें केवल उपदेश नहीं, बल्कि वेद, गीता, कुरान और बाइबल के संदर्भों के साथ समझाई जाती हैं—जो किसी भी जिज्ञासु व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। जज ने यह भी कहा कि संत रामपाल जी महाराज के अनुयायियों के जीवन में जो व्यवहारिक परिवर्तन दिखाई देते हैं, वह अपने आप में बड़ा संकेत हैं। नशामुक्त जीवन, दहेज रहित विवाह, पारिवारिक शांति, सामाजिक अनुशासन और सेवा—ये सब बातें केवल भाषणों से नहीं आतीं, बल्कि किसी गहरी वैचारिक समझ से जन्म लेती हैं। उन्होंने अन्नपूर्णा मुहिम का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने “केवल राहत नहीं, बल्कि संगठित सेवा मॉडल” बताया। जज के अनुसार, बाढ़ राहत, भोजन वितरण, आवास निर्माण और सफ़ाई अभियानों में जिस अनुशासन और पारदर्शिता के साथ काम हुआ, वह किसी भी सामाजिक आंदोलन के लिए मिसाल है। सेशन जज ने एक अहम बात यह भी कही कि “किसी व्यक्ति या विचार को समझने से पहले उसे सुनना ज़रूरी है। बिना पढ़े, बिना देखे, केवल सुनी-सुनाई बातों पर राय बनाना न्याय नहीं है।” उनका मानना है कि संत रामपाल जी महाराज के मामले में समाज ने लंबे समय तक एकतरफ़ा नैरेटिव सुना। लेकिन अब ज़मीन पर दिख रहे बदलाव—किसानों का समर्थन, सामाजिक संगठनों की भागीदारी और आम लोगों के जीवन में सुधार—अपने आप सवाल खड़े कर रहे हैं। इस दूसरे भाग में सामने आया यह बयान साफ़ संकेत देता है कि संत रामपाल जी महाराज को लेकर बहस अब केवल आरोपों तक सीमित नहीं रही। अब सवाल यह नहीं है कि क्या कहा गया, बल्कि यह है कि क्या देखा और परखा गया। सेशन जज के इन खुलासों के बाद एक बात तय है— देश में संत रामपाल जी महाराज को लेकर चर्चा का स्वर बदल रहा है। अब फैसला आरोपों से नहीं, तथ्यों और अनुभवों से होने लगा है। आगे क्या और खुलासे सामने आएँगे? क्या यह बयान समाज की सोच को बदल पाएगा? इस पर नज़र बनाए रखिए—क्योंकि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।