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भागदौड़ भरी इस आधुनिक जीवनशैली में हम भौतिक सुखों के पीछे इतना दौड़ रहे हैं कि मानसिक शांति कहीं पीछे छूट गई है। ऐसे में रविवार स्वामीनारायण सत्संग केवल एक धार्मिक सभा नहीं, बल्कि आत्मा को चार्ज करने वाला एक पावर-हाउस है। भगवान स्वामीनारायण ने मानव मात्र के कल्याण के लिए 'सत्संग' को सबसे सुलभ माध्यम बताया है। रविवार का दिन, जो दुनिया के लिए छुट्टी का दिन है, एक सत्संगी के लिए 'आध्यात्मिक उन्नति' का दिन होता है। सत्संग क्या है? (भगवान स्वामीनारायण की दृष्टि में) वचनामृत में भगवान स्वामीनारायण ने बार-बार सत्संग की महिमा गाई है। सत्संग का अर्थ है—'सत्य का संग'। जब हम भगवान और उनके निष्काम संत के सान्निध्य में बैठते हैं, तो हमारे भीतर के दोष दूर होने लगते हैं। कुसंग का त्याग: सत्संग हमें बाहरी और आंतरिक कुसंग से बचाता है। आत्म-साक्षात्कार: यह हमें देह भाव से ऊपर उठाकर आत्म भाव में स्थित करता है। रविवार सत्संग सभा के मुख्य स्तंभ 1. कीर्तन भक्ति और मानसिक शुद्धि सत्संग की शुरुआत सुरीले कीर्तनों से होती है। नंद संतों द्वारा रचित पद जब कानों में पड़ते हैं, तो मन की चंचलता शांत हो जाती है। 'भक्ति' केवल गीत गाना नहीं है, बल्कि परमात्मा के चरणों में समर्पित होने का भाव है। 2. कथा-वार्ता: जीवन की समस्याओं का समाधान रविवार की सभा में संतों द्वारा शास्त्रों (वचनामृत, शिक्षापत्री, भक्तचिंतामणि) का निरूपण किया जाता है। यहाँ हमें सीखने को मिलता है कि: क्रोध पर विजय कैसे पाएँ? परिवार में सामंजस्य कैसे बनाएँ? व्यसनों से मुक्त रहकर एक आदर्श जीवन कैसे जिएं? 3. बच्चों और युवाओं के लिए संस्कार स्वामीनारायण सत्संग की सबसे बड़ी विशेषता इसके बाल और युवा मंडल हैं। यहाँ बच्चों को बचपन से ही 'आज्ञा और उपासना' के संस्कार दिए जाते हैं। उन्हें मोबाइल की लत से हटाकर सेवा और अनुशासन की ओर मोड़ा जाता है। आधुनिक युग में मूल्यनिष्ठ शिक्षा और सत्संग जैसा कि पूर्व में स्वामीजी ने कहा है, आज की शिक्षा प्रणाली में 'मूल्यों' की कमी है। रविवार सत्संग उस कमी को पूरा करता है। यहाँ व्यक्ति को केवल 'अर्थ संपन्न' (आर्थिक रूप से मजबूत) होना ही नहीं, बल्कि 'अस्मिता संपन्न' (नैतिक रूप से मजबूत) होना सिखाया जाता है। "सत्संग से बुद्धि निर्मल होती है और निर्मल बुद्धि से ही सही निर्णय लिए जा सकते हैं।" सत्संग को जीवन का हिस्सा बनाएँ रविवार का सत्संग केवल दो घंटे का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह पूरे सप्ताह के लिए सकारात्मक ऊर्जा का संचार है। यदि हम भगवान स्वामीनारायण की आज्ञा के अनुसार जीवन जीते हैं और नियमित सत्संग करते हैं, तो संसार की कोई भी मुश्किल हमें विचलित नहीं कर सकती। आइए, इस रविवार हम संकल्प लें कि हम सपरिवार सत्संग सभा में उपस्थित होंगे और अपने जीवन को 'मूल्यनिष्ठ' बनाएंगे। Primary: स्वामीनारायण रविवार सत्संग (Swaminarayan Sunday Satsang) Secondary: वचनामृत सार (Vachanamrut Essence), संस्कार और शिक्षा (Values and Education), बीपीएस सत्संग (BAPS Satsang), आध्यात्मिक शांति (Spiritual Peace), भगवान स्वामीनारायण के उपदेश। Long-tail: रविवार सत्संग का महत्व, स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्कार, सत्संग से जीवन परिवर्तन। #Swaminarayan #Satsang #SundaySatsang #SpiritualAwakening #Hinduism #Vachanamrut #BAPS #Peace #MoralValues #Sanskar #DivineEnergy #AksharPurushottam #LifeManagement